सबसे प्यारा अपना देश।
बच्चों! इनकी करिये याद
यहाँ हुए थे ध्रुव-प्रहलाद।
भरत सिंह के गिनते दाँत
उनका देश न खाए मात
राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न
जो वरदान बनाते विघ्न।
मुरलीधर औ गिरिधर एक
गीता मानवता की टेक-
जीते जिसने सारे केश
सबसे प्यारा अपना देश।
पड़ा महासागर का नाम
गंगा का यश अतुल लाभ
दिया हिमालय को अभिधान-
किसे प्राप्त ऐसे अभिमान?
छह ऋतुएँ सौंदर्य अपार
प्रकृति किये शत-शत श्रंगार
बहुविध नृत्य और संगीत
संतो का साहित्य पुनीत।
बाल्मीकि औ व्यास महान
तुलसी, मीरा के शुभगान-
पावनता का प्रिय परिवेश
सबसे प्यारा अपना देश।
खुसरो की प्यारी कव्वाली
अकबर ने मानवता पाली
था रवीन्द्र को सब जग एक
प्रेम गाँधी का था टेक।
लोकतन्त्र सर्वोच्च महान
सभी व्यक्ति हैं एक समान
सब अपने सबसे ही प्रेम
सबका मंगल, सबका क्षेम।
सभी करें प्रेमामृत-पान
सभी करें भारत-जयगान-
रहें राष्ट्र का उज्जवल वेश
सबसे प्यारा अपना देश।
- डॉ० रामप्रसाद मिश्र
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