कली गुलाब की
आज या कल
ओस कणिका-
आकाश से ढल,
पल में देगी
छुअन शबाब की। कली गुलाब की
आ नयन में
जायेगी चली-
छोड़ मन में,
खुशबू किसी वक्त
के, नवाब की। कली गुलाब की
बैठ शूलों
झूल बचपन
'उम्मीद' के झूलों,
गाएगी कविता
प्रेम कविता की। कली गुलाब की
- नरेन्द्र बहादुर सिंह 'उम्मीद'
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