नन्हें-नन्हें तारो
जागो निहारो
मोना तुम्हें, तुम-
'मोना' को पुकारो।
घोंसले में सोई
घर की नन्ही चिड़िया,
सपनों में खोई
'शैलजा' की गुड़िया
चन्दा की थाली में
आरती उतारो। 'मोना' तुम्हें, तुम.....
तुम तो प्रसाद के
जैसे हों बताशे,
या फिर दिवाली के
फुलझड़ी तमाशे,
लक्ष्मी-गणेश, 'पूजा'-
को दे डारो। 'मोना' तुम्हें, तुम.....
(मोना, शैलजा, पूजा नाम की नन्ही बच्चियों ने कविता सुनाने के आग्रह पर, जब कवि को, 'ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार' नामक कविता, फर्राटे से सुनाई तो इससे अभिभूत होकर, उन बच्चियों को यह कविता लिख कर भेंट की गई।)
- नरेन्द्र बहादुर सिंह 'उम्मीद'
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