Wednesday, January 16, 2008

धरा बना दें स्वर्ग समान

हम अबोध बालक हैं अपनी,
भारत माँ की प्रिय सन्तान।
उसकी रक्षा-हित तत्पर हैं,
करने को सब कुछ बलिदान।

बिस्मिल, भगत, सुभाष हमीं में,
राणा, शिवा, पटेल महान।
नेहरू, गाँधी, शेखर, मोती,
वह हमीद जननी अभिमान।

सबसे भारी फौज हमारी,
देखो चाहे विश्व तमाम।
सबके अरमानों की दुनियाँ,
सबका सुख, सबकी आराम।

जग उपवन सुरभित है हमसे,
सबको करते सौरभ दान।
कष्टों का यह सिन्धु सुखाकर,
धरा बना दें स्वर्ग समान।

सत्य, अहिंसा, सदाचार के,
हम ले आयेंगे तूफ़ान।
भ्रष्टाचार जलधि सूखेगा,
होवे जितना बड़ा उफान।

नव निर्माणों की बेला में,
प्रतिपल आगे बढ़ना काम।
लक्ष्य-प्राप्ति के अन्तिम क्षण तक,
नहीं करेंगें हम विश्राम।

- रामखेलावन वर्मा 'सरोज'

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