सीधे-सादे सच्चे बापू
निडर नियारे अपने बापू
जग जीवन के प्यारे बापू
धीर वीर साहसी अनोखे,
कर्म-धर्म के मर्म अनोखे!
विनय-सदय निर्भीक अनोखे
कालजयी जय कीर्ति अनोखे
सत्पथ राही दीनबंधु थे
भारत माता के सपूत थे
संयम-नियम डगर पर चलते
मोहन करम चन्द्र प्यारे थे
कभी न हिम्मत हारे बापू
सच को गले लगाए बापू
सत्य-अहिंसा-भाई चारे
का गुरुमंत्र सिखाये बापू
निज कर्तव्य किये जाते थे,
चारु चरित्र दिए जाते थे।
भेद-भाव से दूर सदा रह,
प्रेम पवित्र दिए जाते थे॥
जन-जन की आंखों के तारे,
देश-विदेश सुधि मन प्यारे!
सादा जीवन जहाँ निहारे-
उच्च विचार वहाँ हों प्यारे!!
- डॉ० महेश चन्द्र मिश्र 'विधु'
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