Saturday, September 19, 2009
Friday, September 18, 2009
Wednesday, September 9, 2009
चुभन आज भी बाकी है
आँखों में टूटे सपनो की चुभन आज भी बाकी है
बालों में उसकी उँगलियों की छुअन अब भी बाकी है
ज़माने की लगाई आग तो कब की बुझ गई यारों
मेरे सीने के छालों में जलन अब भी बाकी हैं
कौन कहता है कोई रिश्ता नही रहा उन से
उसके माथे पे मेरे नाम की शिकन अब भी बाकी हैं
छाने लगे अंधेरे तो क्या हुआ
वादों की किरण अब भी बाकी हैं
मुझ से अपना दर्द छुपा नही सकते
मुझ में तुम्हारी नज़रें पढने का फन आज भी बाकी हैं।
बालों में उसकी उँगलियों की छुअन अब भी बाकी है
ज़माने की लगाई आग तो कब की बुझ गई यारों
मेरे सीने के छालों में जलन अब भी बाकी हैं
कौन कहता है कोई रिश्ता नही रहा उन से
उसके माथे पे मेरे नाम की शिकन अब भी बाकी हैं
छाने लगे अंधेरे तो क्या हुआ
वादों की किरण अब भी बाकी हैं
मुझ से अपना दर्द छुपा नही सकते
मुझ में तुम्हारी नज़रें पढने का फन आज भी बाकी हैं।
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